Sh. Bhupesh Baghel

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस के श्री.भूपेश बघेल जी ने शपथ ग्रहण की और राज्य के विकास के एक नये अध्याय की शुरूआत की। भूपेश बघेल जी छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते हैं। युवक कांग्रेस से राजनीति का शुभारंभ करने वाले भूपेश बघेल जी बेहद अनुभवी नेता हैं। वे संयुक्त मध्यप्रदेश की सरकार में भी मंत्री रहे, दो बार कैबिनेट मंत्री भी रहे। पांच बार विधानसभा में पहुंचे स्नातकोत्तर भूपेश बघेल जी उप नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष श्री.भूपेश बघेल जी को पार्टी की कमान बेहद संकट के दौर में सौंपी गई थी। सन 2013 का विधानसभा चुनाव बीत चुका था और पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा था, राज्य में एक बार फिर श्री.रमन सिंह जी की सरकार पदारूढ़ हो चुकी थी। यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस 2013 के विधानसभा चुनाव में उस सिम्पैथी को भी कैश नहीं करा पाई थी जो झीरम कांड के चलते उसे मिली थी। नक्सलियों ने झीरम घाटी में कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं की हत्या कर दी थी, इस कांड में 32 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। तो ऐसी कठिन परिस्थिति में भूपेश बघेल जी को राज्य में कांग्रेस की कमान सौंपी गई। उनके सामने तीन बार की विजेता रमन सरकार के मुकाबले कांग्रेस को खड़ा करने की चुनौती थी।

कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव २०१८ यह ‘करो या मरो’ के समान ही था। पार्टी अध्यक्ष श्री.भूपेश बघेल जी ने इसके लिए बाकायदा रणनीति बनाते हुए भाजपा के विकास को कथित विकास कहना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने भाजपा पर खूब जुबानी हमले किए, सोशल मीडिया का भी जबरदस्त सहारा लिया। इसके लिए नुक्कड़ सभाओं पर ज्यादा जोर दिया गया, कांग्रेस के बड़े नेता गांवों में रात्रि प्रवास भी करने लगे। इन सभी कवायदों का असर दिखा और अंतत:, कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई। श्री.भूपेश बघेल जी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद कई ऐसे आंदोलन हुए जिसने कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास लौटाया और पार्टी को एकजुट किया। इनमें से कुछ उल्लेखनीय हैं...

    1. - सरकार ने धान खरीद की सीमा 10 क्विंटल की तो भूपेशजी ने धान बेचने का बहिष्कार करा दिया। सरकार को सीमा बढ़ाकर 15 क्विंटल करनी पड़ी।
      - सरकार ने सामुदायिक वनाधिकार पट्टों को निरस्त करने के लिए ग्रामसभा रखी तो भूपेश जी विरोध में खड़े हो गए और सरकार को कदम पीछे खींचना पड़ा।
      - आदिवासियों की जमीन का कानून बदला तो भूपेश जी ने बड़ा आंदोलन खड़ा किया और सरकार को भू राजस्व संहिता संशोधन का कानून वापस लेना पड़ा।
      - सरकार ने ग्राम सभाओं के बजट से मोबाइल टॉवर लगाने का एलान किया था। भूपेश जी ने इसे ग्राम सभाओं के बजट का अपव्यय बताया। अंतत: यह आदेश भी वापस लेना पड़ा।
      - राशन कार्डों के निरस्तीकरण पर भी भूपेश जी के नेतृत्व में पार्टी ने बड़ा आंदोलन खड़ा किया। इन आंदोलनों से भूपेश बघेल जी की छवि पार्टी के ऐसे नेता के रूप में बनी जो लड़ाई से पीछे
         नहीं हटते, एक मर्यादा में रहकर विरोध करते रहते हैं।

  • श्री.भूपेश बघेल जी ने न सिर्फ राजनीतिक लड़ाईयां लड़ीं बल्कि तमाम विरोधों और दमन के बावजूद सख्ती से मोर्चे पर डटे भी रहे। भाजपा सरकार में कई अधिकारी उनपर व्यक्तिगत हमले भी करते रहे लेकिन भूपेश जी ने कभी हार नहीं मानी और जूझते रहे। उन्होंने पार्टी संगठन को एकजुट बनाए रखा और प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की वापसी को पार्टी का संकल्प बना लिया। भूपेश जी की तेज तर्रार छवि कुछ ऐसी है कि उन्होंने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने वाले पदाधिकारियों तक को तत्काल पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

    भूपेश बघेल जी ने राज्य में पद यात्राएं कर संगठन को नये सिरे से खड़ा करने का प्रयास शुरू किया। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया को भी जरिया बनाया और लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर बने रहे। जल्द ही उनकी छवि एक जुझारू तेवर वाले नेता के रूप में सामने आ गई। कुछ माह पूर्व तक लगभग निष्क्रिय पड़ी कांग्रेस में नई जान आ गई और संगठन नई हिम्मत के साथ खड़ा हो गया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री.भूपेश बघेल जी को जमीनी लड़ाई लड़कर पार्टी में जान फूंकने का श्रेय दिया जाता है।

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